सोमवार, 15 सितंबर 2025

प्यासा कौआ

प्यासा कौआ की कहानी

प्यासा कौआ: बुद्धि और हिम्मत की अनुपम कथा

प्यासा कौआ: बुद्धि और हिम्मत की अनुपम कथा

एक बार की बात है, एक उमस भरी दोपहर में, जहां सूरज की तपती किरणें धरती को झुलसा रही थीं, एक काला कौआ आसमान में उड़ता हुआ पानी की तलाश में भटक रहा था। उसकी प्यास इतनी तेज थी कि उसकी चोंच सूख चुकी थी और पंख थकान से झुकने लगे थे। दूर-दूर तक कोई नदी या तालाब नहीं दिख रहा था। क्या वह इस प्यास से मर जाएगा? या कोई चमत्कार होगा? कौआ ने हार नहीं मानी और लगातार खोजता रहा।

प्यासे कौए की खोज

चित्र: प्यासे कौए की खोज

अचानक, उसकी नजर एक पुराने बगीचे में पड़ी, जहां एक टूटा-फूटा घड़ा जमीन पर रखा था। कौआ उत्साह से नीचे उतरा और घड़े की ओर दौड़ा। लेकिन अफसोस! घड़े में पानी तो था, पर इतना कम कि उसकी चोंच उस तक पहुंच ही नहीं पा रही थी। पानी की सतह नीचे थी और घड़े का मुंह संकरा। कौआ ने कई बार कोशिश की – चोंच डाली, उछला, लेकिन पानी तक पहुंचना नामुमकिन लग रहा था। क्या अब सब खत्म हो जाएगा? कौआ ने सोचा, "नहीं, मुझे कोई तरीका निकालना होगा।"

घड़े की खोज

चित्र: घड़े की खोज

तभी, कौए की तेज नजर आसपास बिखरे छोटे-छोटे कंकड़ों पर पड़ी। एक विचार उसके दिमाग में कौंधा! उसने एक कंकड़ अपनी चोंच में दबाया और घड़े में डाल दिया। पानी की सतह थोड़ी ऊपर उठी। उत्साहित होकर, उसने एक और कंकड़ डाला, फिर एक और। धीरे-धीरे, कंकड़ों की संख्या बढ़ती गई। हर कंकड़ के साथ पानी ऊपर आता गया। कौआ थक रहा था, लेकिन उसकी बुद्धि उसे रुकने नहीं दे रही थी। आखिरकार, इतने कंकड़ डालने के बाद पानी की सतह इतनी ऊपर आ गई कि कौआ आसानी से अपनी चोंच डुबोकर पानी पी सका। उसकी प्यास बुझ गई और वह खुशी से कांव-कांव करता हुआ उड़ गया।

कंकड़ डालते हुए

चित्र: कंकड़ डालते हुए

कहानी का नैतिक

जहां चाह वहां राह। जब मुश्किलें आती हैं, तो बुद्धि और मेहनत से हर समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। कभी हार मत मानो, क्योंकि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है।

नैतिक दृश्य

चित्र: नैतिक दृश्य

यह कहानी eStory Home से ली गई है। अधिक कहानियों के लिए ब्लॉग पर बने रहें!

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